उज्जैन के गीता भवन सभागार में शनिवार को तीन दिवसीय युवा धर्म संसद-2026 का समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को धर्म का मर्म और उसका वास्तविक उद्देश्य समझने की प्रेरणा देता है।
सत्य, करुणा और अनुशासन को बताया आधार
मुख्यमंत्री ने धर्म को सत्य, करुणा और अनुशासन पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में बौद्धिक विमर्श की पुरानी परंपरा रही है और संत समाज जीवन की जटिलताओं को समझने के साथ सामाजिक विकृतियों से सावधान करता है।
खास बातें
- गीता भवन सभागार में तीन दिन चला आयोजन
- देशभर के संत, विद्वान और युवा शोधार्थी हुए शामिल
- मुख्यमंत्री ने संघर्ष, साहस और मित्रता के मूल्यों पर रखे विचार
डॉ. यादव ने उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए इसे सप्तपुरियों में शामिल बाबा महाकाल की नगरी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ने दुनिया में देश को विशिष्ट पहचान दिलाई है।
संघर्ष और आत्मविश्वास पर युवाओं को संदेश
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिनाइयां साहस दिखाने का अवसर देती हैं। उनके अनुसार सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास से सफलता हासिल की जा सकती है।
राधाष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम से जुड़ी श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को प्रेरक बताया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में मित्र की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
देशभर से आए संत, विद्वान और युवा शोधार्थी
समारोह में पूज्य श्री मिथिलेशशरण नंदिनी महाराज ने कृतज्ञता को मानवीय गुण बताते हुए ऐसे आयोजनों को जारी रखने की जरूरत बताई। सेवा प्रतिष्ठानम् के राष्ट्रीय सचिव श्री माधव जी ने अतिथियों, संतों, विद्वानों और युवा शोधार्थियों के प्रति आभार जताया तथा आयोजन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।


