पारंपरिक माटी शिल्प को बढ़ावा देने और कुम्हार समुदाय की आजीविका को सहयोग देने के लिए कलेक्टर विकास मिश्रा ने आदेश जारी किया है। इसके तहत जिले के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले हाट बाजारों में पारंपरिक माटी शिल्पियों को उनके उत्पादों के विक्रय के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इन शिल्पियों से किसी प्रकार की कर वसूली भी नहीं की जाएगी।

जिले के कुम्हार समुदाय के पारंपरिक शिल्पियों द्वारा मिट्टी की मूर्तियां, दीपक, खिलौने, सजावटी सामग्री सहित विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं। नवरात्रि और दीपावली के अवसर पर इन उत्पादों की बिक्री बढ़ जाती है और यही उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है।

कलेक्टर ने संबंधित स्थानीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि माटी शिल्पियों को हाट बाजारों में सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराया जाए। स्थान का चयन इस प्रकार किया जाए कि बाजार में यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। साथ ही, शिल्पियों से स्टॉल या विक्रय स्थल के लिए किसी प्रकार का कर नहीं लिया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक माटी शिल्प को प्रोत्साहन देना, स्थानीय शिल्पकारों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना तथा मिट्टी से बने दीपक, मूर्तियों, खिलौनों और अन्य उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि नवरात्रि और दीपावली के अवसर पर स्थानीय माटी शिल्पियों द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के दीपक एवं अन्य उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता दें। इससे पारंपरिक कला को संरक्षण मिलने के साथ स्थानीय शिल्पकारों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।