बनवाड़ा निवासी जयबाला आज आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। जयबाला ने बताया कि वे वर्ष 2019 में आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी। समूह से प्राप्त 20 हजार रुपये की राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी। इसके बाद समूह की दीदियों के साथ मिलकर गणवेश तैयार करने का कार्य किया। इस कार्य से समूह की सभी महिलाओं ने मिलकर लगभग 40 से 50 हजार रुपये की आय अर्जित की।

जयबाला ने बताया कि उन्होंने डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर छोटे स्तर पर टेंट व्यवसाय शुरू किया। टेंट व्यवसाय से प्राप्त आय को व्यवसाय में लगाते हुए उन्होंने 5.5 लाख रुपये का ऋण लिया। इससे उन्होंने टेंट व्यवसाय के लिए आवश्यक सामग्री खरीदी। आज उनके पास लगभग 8 से 8.5 लाख रुपये की टेंट सामग्री उपलब्ध है और वे बड़े कार्यक्रमों के लिए भी टेंट लगाने का कार्य कर रही हैं।

आजीविका मिशन से जुड़कर जयबाला ने विभिन्न प्रशिक्षण भी प्राप्त किए। उन्होंने केवीके कालूखेड़ा, भोपाल और आरसीटी में कृषि संबंधी प्रशिक्षण लिया। जैविक खाद और पोषण वाटिका के संबंध में जानकारी प्राप्त कर उन्होंने अन्य महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित किया। पिछले सात-आठ वर्षों से वे अपने खेत में सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं। इस बार सब्जी उत्पादन से उन्हें लगभग 70 से 80 हजार रुपये का मुनाफा हुआ।

जयबाला ने बताया कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बहुत बदलाव आया है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिला। आज वे स्वयं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ ही अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

जयबाला ने आजीविका मिशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद दिया।