प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के माध्यम से छिंदवाड़ा जिले के परासिया विकासखंड के ग्राम उमरेठ की श्रीमती लीला बाई साहू ने मेहनत-मजदूरी से स्वरोजगार तक का सफर तय किया है। कभी मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करने वाली लीला बाई आज पापड़ एवं सेवई निर्माण का व्यवसाय संचालित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उनकी सफलता बताती है कि सही मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं भी अपने हुनर को व्यवसाय में बदल सकती हैं। मजदूरी से स्वरोजगार की ओर बढ़े कदम केवल कक्षा 5वीं तक शिक्षित श्रीमती लीला बाई साहू पहले मेहनत-मजदूरी कर परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करती थीं। मजदूरी से उन्हें प्रतिमाह लगभग 4 से 5 हजार रुपये की आय होती थी, जिससे परिवार की जरूरतों को पूरा करना कठिन था। इसी दौरान उद्यानिकी विभाग के अमले के संपर्क में आने पर उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की जानकारी मिली। विभाग के मार्गदर्शन में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, शाखा उमरेठ के माध्यम से पापड़, सेवई एवं मसाला चक्की के व्यवसाय के लिए 2.36 लाख रुपये का बैंक ऋण स्वीकृत हुआ। योजना से मिली आर्थिक सहायता का उपयोग कर उन्होंने पापड़ एवं सेवई निर्माण के लिए आधुनिक शक्तिचलित मशीनें खरीदीं। इनमें 1 एचपी की पापड़ निर्माण मशीन तथा 2 एचपी की सेवई निर्माण मशीन शामिल हैं। मशीनों के उपयोग से उत्पादन में तेजी आई और उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। उत्पादन बढ़ा, आय में हुआ सुधार और मिला रोजगार - आधुनिक मशीनों की मदद से श्रीमती लीला बाई साहू अब प्रतिदिन लगभग 15 से 20 किलोग्राम सेवई तथा 4 से 5 किलोग्राम आटे के पापड़ का निर्माण कर रही हैं। हस्तचलित मशीनों की तुलना में शक्तिचलित मशीनों से तैयार उत्पादों की बेहतर गुणवत्ता के कारण स्थानीय बाजार में उनकी मांग बढ़ी है। व्यवसाय से अब उन्हें प्रतिमाह लगभग 12 हजार रुपये की आय हो रही है। अपने व्यवसाय के माध्यम से श्रीमती लीला बाई ने एक महिला और एक पुरुष को भी रोजगार उपलब्ध कराया है। इस तरह उनका उद्यम न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में सहायक बना है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का माध्यम भी बना है। व्यवसाय को और आगे बढ़ाने का संकल्प - श्रीमती लीला बाई साहू का ‘साहू सेवई एवं पापड़ निर्माण’ उद्यम अब स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। भविष्य में वे आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ाने के साथ बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना चाहती हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना से मिली सहायता और मार्गदर्शन ने श्रीमती लीला बाई साहू को मजदूरी से स्वरोजगार तक पहुंचने का अवसर दिया है। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायी है और दर्शाती है कि मेहनत, आत्मविश्वास तथा शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
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"कहानी बदलाव की" मेहनत-मजदूरी से स्वरोजगार तक का सफर, श्रीमती लीला बाई साहू बनीं सफल महिला उद्यमी

टंटा डेस्क · छिंदवाड़ा · 11 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना से मिला व्यवसाय को विस्तार देने का अवसर




